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रावत की कलम से

हम भी हैं जोश में

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रेड्डी की चड्डी

कर्णाटक विधान सभा में जो ड्रामा हो रहा है वो भारतीय जनतंत्र के लिए एक निहायत शर्मनाक वाकया है. बावजूद इसके, की विरोध करने वाले लोग भी दूध के धुले नहीं है याने उनकी पार्टियाँ भी इस प्रकार के भ्रस्ताचार में लिप्त हैं जहाँ जहाँ सत्ता में हैं; एक नागरिक के नाते यह मानता हूँ की मुद्दा अपने आप में सोलह आना सही है और इस पर देश की संसद व विधायिका को फ़ौरन ध्यान देना चाहिए.. रेड्डी ब्रदर्स खान व्यापार के सबसे बड़े खिलाडी हैं और वर्षों से कर्णाटक एवं महारास्ट्र में खानों से अपने लिए सोना पैदा करते आ रहें है. जाहिर है कि सत्ता और शक्ति जो आजकल पैसे के बल पर आती है , उनके पास भरपूर है. अभी हाल में जब वे रूठे थे तब बी. जे. पी. वालों ने पुचकार कर मना भी लिया था. खाने खोदते हैं/ लोहा व अन्य खनिज निकाल कर बेचते हैं और साथ साथ गैर कानूनी खनन – भूमि हथिया कर और भी ज्यादा तिजोरी भरते हैं फिर भी दोनों भाई कर्णाटक की मंत्री परिषद् में क्रमशः पर्यटन एवं खान मंत्री बने बैठें हैं. हाय री देश की राजनीति. जो पार्टी ‘सिद्धांतवादी’ होने का ढिंढोरा पीटती है उसके ये हाल हैं. बेल्लारी के दोनों रेड्डी ब्रदर्स सुषमा ताई (सुषमा स्वराज ) के ख़ास चहेते थे, हैं और रहेंगे. अब हमरा कोई क्या बिगाड़ लेगा. नैतिक और अनैतिक का फर्क तो भारतीय राजनीती में कभी का खत्म हो चूका. पिछले महीने उस बूढ़े कांग्रेसी सियार, अर्जुन सिंह ने यह बताने से भी इंकार कर दिया था की एंडरसन को भोपाल से क्यों और किसकी बिना पर भगाया गया जबकि वह खुद उस समय मुख्य मंत्री था. मैंने एक छोटा सा छंद बनाया है. मुलाहिजा फरमाइए :-

रेड्डी की चड्डी में गायब
खानों का पैसा और सोना
राजस्‍व मंत्री खुद बन बैठे
किसको अब जनता ये रोये .



Tags: DR GIRISH VARSHNEY  

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